गणेश आगमन पर बदला मुंबई का रंग, बड़े साउंड सिस्टम की जगह ढोल-ताशे की बढ़ी धूम
मुंबई। मुंबई के सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों में इस वर्ष खासा उत्साह और एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। गणेश प्रतिमाओं की आगमन शोभायात्राओं में तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के बजाय पारंपरिक ढोल-ताशा पथकों की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है। ध्वनि प्रदूषण पर पुलिस प्रशासन की सख्ती और नियमों के कड़े पालन के चलते गणेश मंडलों ने डीजे व स्टेरियो से दूरी बनाकर अपनी सांस्कृतिक परंपरा की ओर रुख किया है।
साउंड सिस्टम से मोहभंग, मंडप तक सीमित हुई मांग
पिछले दो दशकों से शोभायात्राओं में बड़े साउंड सिस्टम और डीजे का इस्तेमाल बढ़ गया था, जिससे कर्णकर्कश ध्वनि प्रदूषण और आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता था। सरकार द्वारा तय ध्वनि सीमा और पुलिस की सख्त कार्रवाई के बाद अब स्थिति बदल गई है। साउंड सिस्टम संचालकों के अनुसार, आगमन शोभायात्राओं के लिए बड़े साउंड सिस्टम की मांग में भारी गिरावट आई है। अधिकांश मंडल अब पुलिस अनुमति की जटिलताओं से बचने के लिए केवल अपने मंडपों में ही साउंड सिस्टम लगाना पसंद कर रहे हैं।
ढोल-ताशा पथकों की शत-प्रतिशत बुकिंग, बढ़ी दरें
दूसरी ओर, पारंपरिक वाद्य मंडलियों की मांग इस कदर बढ़ी है कि मुंबई के ढोल-ताशा पथकों की 100 फीसदी बुकिंग हो चुकी है। शनिवार और रविवार को आगमन जुलूसों की अधिकता के कारण पथक दिन में दो-दो शिफ्टों में सेवाएं दे रहे हैं:
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किराया दरें: वर्तमान में 15 ढोल और 6 ताशे वाले एक मानक पथक का किराया औसतन 20 हजार रुपये प्रति घंटा और तीन घंटे के लिए लगभग 60 हजार रुपये तक पहुंच गया है।
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साउंड सिस्टम दरें: तुलनात्मक रूप से दो बेस और दो टॉप वाले छोटे साउंड सिस्टम का किराया 4 से 5 घंटे के लिए करीब 30 हजार रुपये चल रहा है।
पारंपरिक वाद्यों के प्रति यह झुकाव न केवल ध्वनि प्रदूषण के प्रति बढ़ती जन-जागरूकता को दर्शाता है, बल्कि मुंबई के गणेशोत्सव की पुरानी सांस्कृतिक रंगत की वापसी का भी संकेत दे रहा है।

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