मंडला। 
राजनीति के अखाड़े में जब अपनों के ही वार शुरू हो जाएं, तो समझ लीजिए कि अंदरूनी दरार गहरी हो चुकी है। मंडला जिले में भाजपा की ‘अंतर्कलह’ अब सड़कों से होते हुए सीधे मंच तक पहुँच गई है। पूर्व मंत्री देव सिंह सैयाम ने खुले मंच से कैबिनेट मंत्री संपतिया उईके की कार्यप्रणाली पर जो सवाल खड़े किए हैं, उसने जिले की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
मंच से बरसे सैयाम: "अपनों का ही हो रहा अपमान"
नैनपुर में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम उस समय अखाड़ा बन गया जब पूर्व मंत्री देव सिंह सैयाम का दर्द छलक पड़ा। बिना नाम लिए उन्होंने मंत्री और स्थानीय विधायक पर 'मनमानी' का ठप्पा लगा दिया। सैयाम ने कड़े लहजे में कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा लोकतंत्र का अपमान है।
सैयाम के तीखे प्रहार
बेटियों का सम्मान या राजनीति? कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की गैरमौजूदगी पर सैयाम ने नाराजगी जताते हुए इसे भेदभाव करार दिया। सैयाम ने पिछले साल का किस्सा याद दिलाते हुए कहा कि जिस योजना को उन्होंने मंत्री रहते शुरू किया, उसी के कार्यक्रम में उन्हें मंच तक नसीब नहीं हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "उस कार्यक्रम में सरपंच मंच पर थे, लेकिन मुझे जगह नहीं मिली।" (बता दें कि वह सरपंच मंत्री संपतिया उईके की बेटी हैं।)
क्या मंडला में फेल हो रहा है 'सबका साथ-सबका विकास'?
विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है। जब भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री खुद को ही उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, तो आम कार्यकर्ताओं का क्या हाल होगा? सैयाम का यह बयान सीधे तौर पर संपतिया उईके के बढ़ते कद और उनके कार्य करने के तरीके पर हमला माना जा रहा है।  यह केवल एक भाषण नहीं, बल्कि आने वाले समय में मंडला भाजपा के भीतर होने वाले बड़े बदलाव या बड़े टकराव का ट्रेलर है। एक तरफ सत्ता का रसूख है, तो दूसरी तरफ पुराने दिग्गजों का मान-सम्मान। अब देखना यह है कि संगठन इस 'आंतरिक युद्ध' को कैसे शांत करता है।