देवास। 
राजनीति में नेता अक्सर हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन करते हैं, लेकिन देवास में एक नेता जी ने 'हाथ साफ' करने के बजाय खुद को 'गंदा' करना बेहतर समझा। शहर में जाम पड़े नालों और बजबजाते चेंबरों की समस्या से परेशान एक पार्षद प्रतिनिधि ने विरोध का ऐसा तरीका निकाला कि नगर निगम से लेकर राजधानी तक हड़कंप मच गया।
"साहब ने पूछा, तो हम उतर गए"
पूरा मामला नगर निगम कमिश्नर और पार्षद प्रतिनिधि के बीच हुई एक तल्ख बातचीत से जुड़ा है। पार्षद प्रतिनिधि का दावा है कि जब उन्होंने क्षेत्र में पानी जाम होने की गंभीर समस्या कमिश्नर के सामने रखी, तो साहब ने तंज कसते हुए कह दिया— "तो क्या समस्या देखने के लिए अब मैं खुद चेंबर में उतर जाऊं?"
कमिश्नर की यही बात प्रतिनिधि को चुभ गई। उन्होंने आव देखा न ताव, सीधे इलाके के एक गहरे चेंबर का ढक्कन खुलवाया और खुद गंदे पानी के बीच नीचे उतर गए। उन्होंने चेंबर के भीतर से ही जाम की स्थिति दिखाई और प्रशासन को आईना दिखाया।
सुर्खियों में 'चेंबर पॉलिटिक्स'
चेंबर के भीतर से पार्षद प्रतिनिधि का यह प्रदर्शन देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। नगर निगम के अमले में अफरा-तफरी मच गई और अधिकारी मौके पर दौड़े। आश्वासन की घुट्टी पिलाई गई और समस्या के जल्द समाधान का भरोसा दिया गया, जिसके बाद ही नेता जी चेंबर से बाहर निकले।
हकीकत: तमाशा हुआ, समाधान कब?
हालांकि इस 'अनोखे स्टंट' के बाद पार्षद प्रतिनिधि सुर्खियों में तो आ गए और अधिकारियों ने वादे भी कर दिए, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि चेंबर आज भी जाम है। सवाल अब यह उठ रहा है कि क्या जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए जनप्रतिनिधियों को इसी तरह गटर और नालों में उतरना पड़ेगा? या फिर एसी कमरों में बैठने वाले अधिकारी इस 'जमीनी' हकीकत को समझेंगे?