एक ऐसे भी अधिकारी... जो काम में तो नंबर वन हैें लेकिन ग्रह चाल में 'पस्त'! जहाँ जाते हैं, वहीं फूटता है मुसीबतों का ठीकरा
भोपाल, सबकी खबर।
मध्य प्रदेश कैडर के 2013 बैच के ऊर्जावान आईएएस अधिकारी दिलीप यादव इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली से ज्यादा अपने 'सितारों' की गर्दिश को लेकर चर्चा में हैं। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर क्या वजह है कि एक काबिल और साख वाले अफसर के साथ हर नई पोस्टिंग पर कोई न कोई बड़ा हादसा जुड़ जाता है। आज सबकी खबर ने उनके इस 'अनोखे' प्रशासनिक सफर को ग्रहों की चाल से जोड़ते हुए एक बड़ा विश्लेषण किया है।
इंदौर: सिर मुड़ाते ही पड़े ओले
दिलीप यादव ने 9 सितंबर 2025 को इंदौर नगर निगम आयुक्त की कमान संभाली थी। अभी वे कुर्सी को ठीक से समझ भी नहीं पाए थे कि भागीरथपुरा कांड हो गया। दूषित पानी से हुई मौतों ने शहर को हिला दिया। पाइपलाइन पुरानी थी, तकनीकी दोष पहले से था, लेकिन गाज गिरी नए-नवेले कमिश्नर दिलीप यादव पर। भारी राजनीतिक और सामाजिक दबाव के चलते 2 जनवरी 2026 को उन्हें वहां से हटा दिया गया।
पर्यटन विभाग: नया ठिकाना, वही पुराना 'अपयश'
इंदौर से हटने के बाद सरकार ने उन्हें मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (MP Tourism) का एमडी बनाया। भोपाल में बैठकर वे विभाग को संवारने की रणनीति बना ही रहे थे कि जबलपुर के बरगी में क्रूज हादसा हो गया। 13 मौतों के इस भीषण तांडव के बाद एक बार फिर उंगलियां दिलीप यादव की तरफ उठने लगी हैं। सवाल यह है कि विभाग का मुखिया होने के नाते क्या वे इस हादसे की नैतिक जिम्मेदारी से बच पाएंगे?
कटनी में 'यश', इंदौर-जबलपुर में 'अपयश'
दिलीप यादव का कटनी कलेक्टर के तौर पर कार्यकाल आज भी मिसाल के तौर पर याद किया जाता है। वे काम करने और विभाग पर पकड़ बनाने में माहिर माने जाते हैं, लेकिन इंदौर का दूषित जल कांड हो या बरगी का क्रूज हादसा— दोनों ही मामलों में उनका कोई व्यक्तिगत दोष न होते हुए भी 'असफलता का ठीकरा' उन्हीं के सिर फोड़ा गया।
ज्योतिषीय सलाह: क्या कुंडली में है दोष?
वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र जैन का कहना है कि दिलीप यादव को एक बार अपनी कुंडली जरूर दिखानी चाहिए। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, "दिलीप यादव जहाँ जाते हैं, अच्छा काम करते हैं, लेकिन शायद उनके ग्रह कुछ ऐसी चाल चल रहे हैं कि यश की जगह उनके खाते में अनावश्यक अपयश आ रहा है।" क्या प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों की काबिलियत उनके 'लक' और 'सितारों' पर निर्भर करती है? या फिर दिलीप यादव सिस्टम की उन खामियों का शिकार हो रहे हैं जो उनके आने से बहुत पहले ही जड़ें जमा चुकी थीं?

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