MP सियासत में हलचल: अमित शाह से मुलाकात के बाद कैबिनेट से बढ़ी कैलाश और प्रहलाद की दूरियां?
भोपाल।
मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों गलियारों से लेकर आम जनता के बीच एक ही चर्चा है— क्या सूबे के दो कद्दावर मंत्री, कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल, मोहन यादव सरकार से धीरे-धीरे किनारा कर रहे हैं? हालिया घटनाक्रमों और कैबिनेट बैठकों से इनकी नदारदगी ने कई बड़े राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली दौरे के बाद दूरियां
खबरों के मुताबिक, 28 फरवरी को विधानसभा सत्र खत्म होते ही ये दोनों दिग्गज नेता दिल्ली पहुंचे थे। वहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई उनकी मुलाकात के बाद से ही समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि उसी दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अमित शाह से मुलाकात की थी।
कैबिनेट बैठकों से नदारदगी: महज संयोग या संकेत?
इन दोनों वरिष्ठ मंत्रियों की कैबिनेट की पिछली दो बैठकों से अनुपस्थिति चर्चा का मुख्य केंद्र है। कैलाश विजयवर्गीय 2 मार्च को बड़वानी में हुई कैबिनेट बैठक में कैलाश जी शामिल नहीं हुए। उन्हें उसी दौरान पास के एक मेले में नृत्य करते देखा गया, जिससे यह संदेश गया कि वे सरकार के प्रशासनिक कार्यों से ज्यादा संगठन या सामाजिक गतिविधियों में रुचि ले रहे हैं। हालांकि प्रहलाद पटेल के पैर में चोट है, लेकिन वे विधानसभा और अन्य कार्यक्रमों में सक्रिय दिख रहे हैं। इसके बावजूद कैबिनेट बैठक से उनकी दूरी ने अटकलों को हवा दी है।
क्या बदलने वाली है भूमिका?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन दूरियों के पीछे कई बड़े कारण हो सकते हैं। क्या इन दोनों नेताओं ने अपने पदों से इस्तीफे की पेशकश की है?क्या आगामी चुनाव या रणनीति के तहत इन्हें सरकार से निकालकर संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाने वाली है? चर्चा यह भी है कि जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है, जिसमें कुछ चेहरों की छुट्टी और नए नामों (जैसे गोपाल भार्गव) की एंट्री हो सकती है।
दो अलग अंदाज, एक ही सवाल
जहाँ कैलाश विजयवर्गीय अपने बयानों और व्यवहार से कई बार "अपेक्षा" या "बेरुखी" जाहिर कर चुके हैं, वहीं प्रहलाद पटेल अपनी 'धीर-गंभीर' छवि के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन उनकी खामोशी और बैठकों से दूरी बहुत कुछ बयां कर रही है।
फिलहाल मध्य प्रदेश भाजपा के कार्यकर्ता और जनता यह जानने को उत्सुक हैं कि क्या ये दोनों नेता अपने मंत्री पद के दायित्वों से पूरी तरह मुक्त होने जा रहे हैं? अमित शाह के साथ हुई उस 'सीक्रेट' बातचीत का नतीजा आने वाले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश की सत्ता और संगठन में बड़े बदलाव के रूप में दिख सकता है।

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